शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और फिर मुकर जाने पर केस कैसे करें? BNS धारा 69 की पूरी जानकारी (आसान हिंदी में)

पहले सवाल का सीधा जवाब

अगर किसी पुरुष ने शादी करने का वादा करके किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन उसकी नीयत शुरू से ही शादी करने की नहीं थी, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत अपराध है। इसमें 10 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

पहले यह मामला ज़्यादातर IPC की धारा 375/376 (बलात्कार) के तहत चलता था। अब 1 जुलाई 2024 से लागू BNS में इसके लिए अलग धारा बनाई गई है।

ज़रूरी बात: हर टूटी हुई शादी या टूटा हुआ रिश्ता अपराध नहीं होता। इसी फर्क को समझना इस पूरे ब्लॉग का मकसद है।

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धारा 69 BNS आसान भाषा में क्या कहती है?

धारा 69 कहती है कि अगर कोई पुरुष धोखे से, या शादी का वादा करके, बिना उसे निभाने की नीयत के, किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाता है, और वह मामला बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, तो उसे 10 साल तक की सज़ा और जुर्माना हो सकता है।

कानून में “धोखे के तरीके” (deceitful means) में ये बातें शामिल मानी गई हैं:

  • नौकरी या प्रमोशन का झूठा वादा
  • किसी तरह का लालच देना
  • अपनी असली पहचान छुपाकर शादी करना

यह अपराध संज्ञेय है, यानी पुलिस FIR दर्ज करके जांच शुरू कर सकती है।


सबसे ज़रूरी फर्क: “झूठा वादा” बनाम “वादा टूट जाना”

सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में साफ कहा है कि इन दो चीज़ों में अंतर है:

 झूठा वादा (अपराध)वादा टूट जाना (अपराध नहीं)
नीयतशुरू से ही शादी करने का इरादा नहीं थाशुरू में सच्चा इरादा था
क्या हुआझांसा देकर संबंध बनाएबाद में परिस्थितियां बदल गईं और शादी नहीं हो सकी
कानूनधारा 69 BNSआम तौर पर अपराध नहीं, दीवानी या सामाजिक मामला

सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग सोनी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2019) में कहा कि वादा शुरुआत में ही झूठा साबित होना चाहिए। हाल के प्रदीप कुमार केसरवानी मामले (2025) में भी कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वादा पूरा न होना धोखा नहीं है, और फर्जी या कमज़ोर शिकायतों पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़नी चाहिए।


अलग-अलग काल्पनिक उदाहरणों से समझिए

नीचे दिए सभी उदाहरण समझाने के लिए बनाए गए काल्पनिक उदाहरण हैं, किसी असली व्यक्ति या केस से इनका संबंध नहीं है।

उदाहरण 1: जब धारा 69 बन सकती है (शादीशुदा होना छुपाना)

पटना की रीना की मुलाकात राकेश से एक कोचिंग सेंटर में हुई। राकेश ने कहा कि वह अविवाहित है और जल्द ही परिवार से बात करके शादी करेगा। रीना को भरोसा हुआ। दो साल बाद पता चला कि राकेश पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। उसने शुरू से झूठ बोला था।

यहां क्या बनता है: राकेश ने अपनी असली स्थिति छुपाकर और शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाए। यह धारा 69 का क्लासिक मामला बन सकता है।

उदाहरण 2: जब केस कमज़ोर पड़ सकता है (लंबे सहमति वाले रिश्ते में वादा टूटना)

सीमा और अमित पांच साल तक एक-दूसरे को जानते थे और अपनी मर्ज़ी से रिश्ते में थे। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन अमित के परिवार ने जाति के कारण मना कर दिया और अमित पीछे हट गया।

यहां क्या बनता है: अगर शुरू में अमित की नीयत सच्ची थी, तो यह “वादा टूटना” हो सकता है, “झूठा वादा” नहीं। कोर्ट आम तौर पर ऐसे मामलों में देखती है कि रिश्ता कितना लंबा और आपसी सहमति का था।

उदाहरण 3: नौकरी का झांसा

पूजा को एक अफसर ने सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके बदले संबंध बनाने का दबाव बनाया। नौकरी का कोई इरादा था ही नहीं।

यहां क्या बनता है: धारा 69 में “नौकरी या प्रमोशन का झूठा वादा” भी धोखे के तरीके में गिना गया है। यहां शादी का मामला नहीं है, फिर भी धारा 69 लग सकती है।

उदाहरण 4: पहचान छुपाकर शादी

नेहा की शादी विकास से हुई। बाद में पता चला कि विकास ने अपना नाम, पहचान या पृष्ठभूमि झूठी बताई थी।

यहां क्या बनता है: अपनी असली पहचान छुपाकर शादी करके संबंध बनाना भी धोखे के तरीके में आता है।

उदाहरण 5: जब महिला को पहले से सच पता था

कविता को शुरू से मालूम था कि संजय शादीशुदा है और तलाक नहीं हुआ है। फिर भी वह कई साल रिश्ते में रही। बाद में संजय ने शादी से इनकार किया तो उसने केस किया।

यहां क्या बनता है: अदालतों ने कई मामलों में कहा है कि जब सच पता हो, तो “धोखा खाने” का दावा कमज़ोर हो जाता है। हर केस के तथ्य अलग होते हैं।


अगर आप पीड़ित हैं: शादी से मुकरने पर केस कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

स्टेप 1: सबूत इकट्ठा करें और सुरक्षित रखें

यह सबसे अहम कदम है। इनमें से जो भी आपके पास हो, संभालकर रखें:

  • WhatsApp, Instagram या SMS की चैट, जिनमें शादी के वादे हों
  • कॉल रिकॉर्डिंग (अगर आपके पास हैं)
  • फोटो, वीडियो, मंदिर या सगाई की तस्वीरें
  • परिवार के सामने कही गई बातों के गवाह
  • होटल, यात्रा या अन्य रिकॉर्ड, जो रिश्ते को दिखाएं
  • पैसे के लेनदेन का रिकॉर्ड, अगर कोई हो
  • आरोपी के शादीशुदा होने का सबूत, अगर यही धोखा था

सलाह: चैट डिलीट न करें, स्क्रीनशॉट के साथ मूल फोन भी संभालकर रखें।

स्टेप 2: नज़दीकी पुलिस थाने में FIR दर्ज कराएं

  • थाने जाकर लिखित शिकायत दें
  • महिला होने के नाते आप महिला पुलिस अधिकारी से बात करने की मांग कर सकती हैं
  • शिकायत की रसीद या FIR की कॉपी ज़रूर लें
  • आप जहां रहती हैं या जहां घटना हुई, किसी भी थाने में शिकायत की जा सकती है (ज़ीरो FIR)

स्टेप 3: अगर थाना FIR न लिखे

  • लिखित शिकायत डाक से या ईमेल से SP (पुलिस अधीक्षक) को भेजें
  • फिर भी कार्रवाई न हो तो मजिस्ट्रेट कोर्ट में आवेदन दिया जा सकता है

स्टेप 4: मेडिकल जांच और बयान

  • पुलिस ज़रूरत के अनुसार मेडिकल जांच करा सकती है
  • आपका बयान मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज कराया जा सकता है। इसे अदालत में बहुत महत्व दिया जाता है

स्टेप 5: जांच, चार्जशीट और ट्रायल

पुलिस जांच करती है, सबूत जुटाती है और चार्जशीट दाखिल करती है। फिर ट्रायल होता है, जिसमें आपको अदालत में गवाही देनी होती है।

मदद के लिए: महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन नंबर 112।


अगर आप पर आरोप लगा है: आरोपी क्या करे?

अगर किसी ने आप पर शादी का झांसा देने का आरोप लगाया है, तो घबराएं नहीं, लेकिन देरी भी न करें।

  1. सीधे थाने न जाएं, पहले वकील से सलाह लें। आपका हर बयान बाद में इस्तेमाल हो सकता है।
  2. अग्रिम जमानत (धारा 482 BNSS) के बारे में तुरंत विचार करें। गिरफ्तारी से पहले कोर्ट से सुरक्षा मिल सकती है।
  3. अपने सबूत संभालें: चैट, कॉल रिकॉर्ड और वे तथ्य जो दिखाएं कि रिश्ता आपसी सहमति का था या आपकी नीयत सच्ची थी।
  4. अगर FIR बेबुनियाद है, तो हाई कोर्ट में FIR रद्द कराने की याचिका (धारा 528 BNSS) दाखिल की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में सिर्फ वादा टूटने पर बनी कार्रवाई को रद्द कर चुका है।
  5. पीड़िता से संपर्क करके या धमकाकर दबाव बनाने की कोशिश बिल्कुल न करें। इससे आपका केस कमज़ोर हो सकता है और नए आरोप बन सकते हैं।

कोर्ट इन बातों को देखती है

  • वादा करते समय आरोपी की नीयत क्या थी
  • रिश्ता कितने समय चला और क्या वह आपसी सहमति का था
  • क्या महिला को आरोपी की असली स्थिति (जैसे शादीशुदा होना) पहले से पता थी
  • शिकायत करने में कितनी देरी हुई और उसका कारण क्या था
  • चैट और रिकॉर्ड में शादी के वादे और बाद की परिस्थितियों का क्या ब्यौरा है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या शादी से मुकर जाना अपने आप में अपराध है? नहीं। अपराध तब बनता है जब वादा शुरू से झूठा था और उसी के सहारे संबंध बनाए गए।

2. धारा 69 में सज़ा कितनी है? 10 साल तक की कैद और जुर्माना।

3. क्या पुरुष भी इस धारा में पीड़ित हो सकता है? धारा 69 के शब्दों में पीड़ित के रूप में “महिला” का उल्लेख है।

4. क्या FIR दर्ज कराने की कोई समय सीमा है? देरी से शिकायत करने पर कोर्ट कारण पूछ सकती है, इसलिए जल्द से जल्द कदम उठाना बेहतर है।

5. क्या आरोपी को गिरफ्तारी से पहले जमानत मिल सकती है? हां, अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया जा सकता है। फैसला मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।

6. क्या सुलह या शादी हो जाने पर केस खत्म हो सकता है? कुछ मामलों में हाई कोर्ट परिस्थितियों को देखकर कार्यवाही रद्द कर सकती है, पर यह हर केस में अपने आप नहीं होता।


पटना में धारा 69 BNS के केस में कानूनी मदद

चाहे आप पीड़ित हों और FIR व सबूतों में मार्गदर्शन चाहते हों, या आप पर आरोप लगा हो और अग्रिम जमानत या FIR रद्द कराने की ज़रूरत हो, शुरुआती कदम बहुत मायने रखते हैं।

अधिवक्ता अमन कुमार चौधरी (पटना हाई कोर्ट) और बिहार एडवोकेट्स क्लब आपकी स्थिति को गोपनीय तरीके से सुनकर आपको सही कानूनी रास्ता बताएंगे।

📞 +91 7783 060749 📧 advaman2312@gmail.com

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। हर केस के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए अपने मामले पर किसी योग्य अधिवक्ता से सलाह ज़रूर लें। इसमें दिए सभी उदाहरण काल्पनिक हैं।

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